Sunday, 21 June 2026

कुछ नहीं करती हो तुम सारा दिन

 मैं कुछ ख़ास नहीं करती।  

बस परिवार के लिए खाना बना देती हूँ, बच्चों को पढ़ा देती हूँ।  

कभी मेहमान आ जाएँ या त्योहार पास आ जाए तो घर सजा देती हूँ, बस।  


बाकी तो कुछ बड़ा काम नहीं करती।  

हाँ, घर में क्या चीज़ कहाँ रखी है, राशन कब लेना है, किस रिश्तेदार से कब बात करनी है — यह सब मुझे पता रहता है।  

पर दिन भर यूँ ही खाली रहती हूँ।  


बच्चों के छोटे‑मोटे प्रोजेक्ट्स, सांस्कृतिक गतिविधियाँ या इधर‑उधर की कला करवा देती हूँ, और कुछ ख़ास नहीं।  

और हाँ, वो एक छोटी‑सी 9 से 5 की नौकरी भी कर लेती हूँ, जिसमें खाली बैठने के भी पैसे मिल जाते हैं।  


मैं कुछ नहीं करती।  

पर मुझे लगता है कि वो डॉक्टर, वो शिक्षक, वो किसी कंपनी की सीईओ, या वो अंतरिक्ष जाने वाली महिला भी कुछ नहीं करती होंगी।  

और देश की राष्ट्रपति — वो भी कुछ नहीं करती।  

आख़िर देश चलाना कौन‑सी बड़ी बात है!

मेरी प्यारी बहन निकिता की कविता 

22जून 2026 बंगलुरु 

No comments:

Post a Comment